गंगा दशहरा: श्रद्धालुओं ने पवित्र सरयू में लगाई डुबकी, किया दान-पुण्य

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अयोध्या। गंगा दशहरा पर रामनगरी अयोध्या में भी आस्था का संगम दिखाई पड़ा। पर्व को लेकर भारी संख्या में श्रद्धालुओं ने यहां पहुंच कर पतित पावनी मां सरयू में आस्था की डुबकी लगाई और पुण्य के भागीदार बने। गंगा दशहरा पर यहां स्नान के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं की सुरक्षा और बेहतर व्यवस्था को लेकर जिला और पुलिस प्रशासन की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए। साथ ही सरयू घाटों पर विशेष निगरानी की जाती रही।

जिला व पुलिस प्रशासन की ओर से किए गए व्यापक इंतजाम

गंगा दशहरा को लेकर स्नान दान के लिए अयोध्या पहुंचे श्रद्धालुओं ने पवित्र सरयू में डुबकी लगाई और दान- पुण्य किया। स्नान और दान के बाद श्रद्धालुओं में राम नगरी के विभिन्न मठ-मंदिरों में पहुंच अपने आराध्य देवों का दर्शन पूजन किया। गंगा दशहरा पर यहां पहुंचे श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो इसके लिए जिला प्रशासन की ओर बेहतर व्यवस्था की गई। पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा को देखते हुए पुलिस कर्मियों की तैनाती की गई। वही सरयू घाटों पर जल पुलिस की ओर से लगातार निगरानी की जाती रही है।

गंगा दशहरा पर स्नान, दान करने से मिलती है पापों से मुक्ति 

गंगा दशहरा को लेकर धार्मिक मान्यता है कि इस दिन स्नान और दान करने से सभी पापों का नाश होता है। मान्यता यह भी है कि राजा भागीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा धरती पर आई थी। इसीलिए तभी से गंगा दशहरा का पर्व मनाया जाता और इस दी भारी संख्या में श्रद्धालु स्नान और दान करते है।

गंगा दशहरा हिन्दुओं के प्रमुख त्योहारों मे से एक 

गंगा दशहरा हिन्दुओं का एक प्रमुख त्योहार है जो ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी शुभ तिथि पर माँ गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं, यह पर्व मोक्ष, पाप मुक्ति और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन गंगा सहित पवित्र नदियों में स्नान करने से व्यक्ति के कायिक, वाचिक और मानसिक पापों का नाश हो जाता है।

धार्मिक ग्रंथों और संत परंपराओं के अनुसार गंगा और सरयू का गहरा संबंध

पौराणिक कथाओं के अनुसार, राजा भगीरथ ने अपने पूर्वजों की मुक्ति और मोक्ष के लिए कठोर तपस्या की थी, उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर माँ गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुईं, आज के स्नान ध्यान का बाद महत्व माना जाता है। चूंकि माता सरयू को माँ गंगा की बहन माना गया है इसीलिए जो भक्त गंगा स्नान को नहीं पहुच पाते है वह पावन सलिला सरयू मे स्नान-ध्यान करते है।

गुरु-शिष्य परंपरा की मान्यता के अनुसार, मां गंगा को धरती पर लाने का श्रेय राजा भगीरथ को दिया जाता है, जबकि उनके गुरु महर्षि वशिष्ठ माने जाते हैं। पौराणिक कथाओं में सरयू नदी को महर्षि वशिष्ठ की पुत्री कहा गया है। इसी कारण धार्मिक दृष्टि से सरयू को गंगा की बहन अथवा ‘गुरु पुत्री’ के रूप में सम्मान प्राप्त है। संत-महात्माओं की भक्ति परंपरा में सरयू जी का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि सरयू भगवान विष्णु के नेत्रों से प्रकट हुई हैं, इसलिए उन्हें अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी माना जाता है।


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